ये जज़्बात

ये जज़्बात

क्या होते हैं ये जज़्बात, क्यूं होते है ये जज़्बात,
कभी आंसू बन आंखों से छलक जाते है तो कभी शब्दों से बुनकर कागज पर उमड़ आते हैं।
किससे से बयान करें इन्हें, किसलिए बयान करें हम,
दिल का दर्द है, दिल में ही दफन करें हम,

क्यूं उनसे कहें जो इन्हें समझ ना पायें, ये वो मोती हैं जिन्हें बेवजह क्यूं लुटाएं,
दिल के अरमानों को दिल में समेटे बैठें हैं,
कोई देखें ना देखे, हम इन्हें संजोते हैं,
ना कोई चाह है ना ही कोई उम्मीद है उनसे,
ये जज़्बात सिर्फ और सिर्फ हमारे हैं।

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