समंदर का लहरों से रिश्ता

समंदर ने कहा लहरों से, “कुछ देर तो थम जा बाहों में,
यूँ मचलती है क्यूँ , यूँ उछलती है क्यूँ,
क्या रखा हैं उन किनारों में.”
लहरें ना थमी , ना रुकी, ना ठहरी,
कहे लगी, “किनारा है मेरी मंजिल, ना आ तू मरी राहों में,
किनारे करता है मेरा इंतज़ार , जाना है ज़रूरी , ना आ तू मेरे पास,

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