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एक माँ की शंका, एक माँ का भरोसा

 

 

माँ बनना एक अलग ही एहसास है। बहुत सी भावनाएँ, बहुत सी शँकाएं और बहुत सारी खुशियों से जैसे मन भर सा जाता है। हर दिन कुछ नए भाव, कुछ नए विचार और कुछ नए सपनों के बारे में सोचती हुई, एक औरत अपने आने वाले बच्चे कि तैयारियाँ करती है।

 

हर औरत की तरह मैं भी अपने होने वाले बच्चे के लिए बहुत उत्साहित थी। जब खाना खाने लगती, तब सोचती क्या जो मैं खाने जा रही हूँ, वो मेरे बच्चे के लिए सही है? सीड़ियाँ चड़ते व उतरते समय, खास सावधानी बर्तना। हर कदम बहुत सावधानी से रखना। सब कुछ अब बहुत अलग व नया सा लगता था। पहले बाज़ार जाने पर अपने लिए कुछ नई वस्तु तुरंत भा जाती थी, पर अब बाज़ार जाने पर अपने बच्चे के लिए कुछ लेने का मन करता था।

 

एक दिन मेरी माँ मुझे बता रहीं थी कि कैसे मेरे होने के समय, उन्होने सारी तैयारियाँ खुद  थीं। अपने बच्चों के कपड़े वे खुद सिलती, स्वेटर भी वे खुद ही बुनती, लंगोट भी वे खुद ही बनाती थी। उनकी ये बातें सुनकर दिल भाव विभोर हो उठा। मेरे भी दिल में आया कि मैं भी अपने बच्चे के लिए करूं कुछ खास। आखिर इसी को तो ममता कहते हैं।

 

बाज़ार से बहुत सामान लिया, पर फिर भी मन में था कि कुछ खुद भी बनाऊँ। फिर क्या था , कपड़ा, फोम, मलमल, इत्यादि , सभी कुछ ले आई। और खुद ही अपने हाथों से बिछौने व लंगोट बनाए।

 

इस सभी उत्साह के बीच, कुछ शंकाए भी दिल में उठने लगी। क्या ये सभी वस्तुएं साफ एवं स्वच्छ हैं? किसी ने सलाह दी कि बच्चे के कपड़ो को अच्छे से धो कर धूप में सुखाने चाहिए, पर मुझे लगा की क्या सिर्फ धोना ही काफी होगा? जब बात संपूर्ण स्वच्छता व बच्चे की सुरक्षा की हो तो सिर्फ एक ही नाम याद आया: डेटोल।

 

सभी ने कहा कि झुकने का काम हम तुम्हें नही करने देंगे।  तब सासू माँ व ससुर जी आगे आए। दादी दादा जो बनने वाले थे। बच्चे के सभी लंगोट, बिछौने व कपड़े डेटोल में भिगो कर धोए गए। तब मन संतुष्ट हुआ।

 

फिर वो दिन आया। मेरी नन्ही परी का जन्म हुआ। घर खुशियों से भर गया। आज भी उसकी स्वच्छता व सुरक्षा के लिए डेटोल का सैनिटाइज़र व हाथ धोने का लिक्विड उसके बस्ते में हमेशा रखती हूँ।

 

कुछ दिन पूर्व, mycity4kids और डेटोल के सहयोग से हुई मुलाकात में डाक्टर वज़ीर ने नवजात शिशुओं की स्वच्छता की एहमियत बताई तब लगा कि उस वक्त की मेरी शंकाए गलत न थी। डाक्टर ने बताया कि घर में किसी को ज़ुकाम, खाँसी कि शिकायत हो तो वे नवजात शिशु को न छुएं। शिशु को उठाने से पूर्व हाथ अवश्य धोंए। सभी मेहमानों के लिए भी ज़रूरी है कि बच्चे को हाथ लगाने से पूर्व हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें।

 

अंत में बस इतना ही कहना चाहूंगी कि एक मां की शंका और एक माँ का भरोसा कभी गलत नही होता। इसी सिलसिले में एक चलचित्र दिखाना चाहूँगी, ज़रूर देखियेगा।

 

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