Life style, Poetry, Uncategorized, हिन्दी

समंदर का लहरों से रिश्ता

समंदर ने कहा लहरों से, “कुछ देर तो थम जा बाहों में,
यूँ मचलती है क्यूँ , यूँ उछलती है क्यूँ,
क्या रखा हैं उन किनारों में.”
लहरें ना थमी , ना रुकी, ना ठहरी,
कहने लगी, “किनारा है मेरी मंजिल, ना तू मेरी राहों में,
किनारा करता है मेरा इंतज़ार , जाना है ज़रूरी , ना तू मेरे पास,

pexels-photo-748626.jpeg
समंदर था गहरा, हुआ अशांत और अकेला,
देख चंदा की शीतलता , आखिर पूछ ही बैठा ,
कैसे रोकूं इन चंचल लहरों को, कैसेे थामूं इन्हें अपनी बाहों मे ,”
चाँद मुस्कुराया और बोला, “तू परेशान है क्यूँ , तू उदास है क्यूँ,
तू तो समंदर है , लहरों का घर है,
किनारा तो एक आकर्षण है, एक भ्रम है,
उसकी धरती पर तो मिट्टी है, जो उङ जाती है हवाओं से,”

pexels-photo-127673.jpeg
समंदर हुआ शांत, धरधीर बहा के नीर,
चुपचाप देखता रहा लहरों को ,
लहरें आती जाती रहती ,
समंदर सिसकियाँ भरता रहता ,
कुछ तरसती आखों से , कुछ सुबकती साँसों से ,
दिल में दर्द को दबाये रहता ,
रात को चाँद फिर आया , अपनी शीतलता फिर लाया ,
समंदर फिर संभला , फिर कुछ ठहरा ,
उसकी उदासी बस चाँद ही समझता.

pexels-photo-414320.jpeg

0 thoughts on “समंदर का लहरों से रिश्ता”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *