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सास बहु कैसे बने सहेली, रिश्तों की सबसे बड़ी पहेली

सभी रिश्तों में सबसे उलझा एवं मुश्किल रिश्ता होता है सास बहु का। दो औरतें जब बहनें हों, मित्र हों, पार्क में रोज़ मिलती हों; एक प्यारा सा रिश्ता अकसर बनाने में सफल हो जाती हैं। पर न जाने क्यूँ जब वे सास बहु बनती हैं तो चाहते हुए भी वैसा रिश्ता नहीं बना पाती।

आज कल सास बहु का रिश्ता काफी बदल रहा है किन्तु अभी भी कहीं बहु के मन में और कहीं सास के मन में एक उम्मीद बनी रहती है कि काश हमारी बहु बेटी की तरह होती। कहते हैं कि ताली दोनों हाथों से बजती है, यह सच है। जब तक दोनों अपना हाथ आगे नहीं बढाएंगी तब तक ताली नहीं बजेगी और दोनों सहेली नहीं बन पाएगी।

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इसके कुछ कारण जो मैं समझती हूं वो है –

1. इसका पहला कारण है कि दोनों एक दूसरे को समझ नहीं पाती। मां अपने बच्चे को शुरु से ही देखती आ रही है इसलिए वह उसकी अच्छाई व बुराई सब समझ पाती है। सास बहु का रिश्ता एक दम नया होता है, इसलिये समय तो देना चाहिए।

2. दो घरों की विविधता इस रिश्ते में कठिनाई का कारण बनती हैं, चाहे वह समान धर्म के लोग हों या अलग धर्म के। पौधे का हवा पानी बदलता है तो वो मुरझा जाता है। एक नव विवाहिता भी उसी पौधे के समान होती है।

3. उम्र का फर्क भी बहुत मायने रखता है। बड़े लोग आसानी से अपने आप को बदल नहीं पाते और उनमें एक आधिपत्य की भावना होती है, फिर वह मां ही क्यों न हो। ऐसे में बहु की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बहु को थोड़ा समझना चाहिए।

4. अहम को छोड़ देना चाहिए। जब तक “मैं” रहेगी, चाहे वह सास मे हो या बहु मे, रिश्ता कभी नहीं बन पाएगा। एक ने कही दूसरे ने मानी, इसी का नाम बुद्धिमानी। किन्तु कोई ज़रूरी नहीं कि हर बार न चाहते हुए भी हां करें। चार बार कहना मानें तो एक बार नहीं भी मानेंगे तो चलेगा।

5. बच्चों से सीखना चाहिए। अभी झगड़ा हुआ और अभी मेल मिलाप हो गया। कभी किसी बात पर वाद विवाद हो भी जाए तो उसको भूलना ही बेहतर है। यदी उस झगड़े को लेकर आगे बढेंगे तो कभी दोस्त नहीं बन पाएंगे।

6. किसी भी रिश्ते में मर्यादा का ध्यान रखना ज़रूरी होता है। हर व्यक्ति का अपना द्रष्टिकोण होता है। उसके द्रष्टिकोण को भी उतनी ही एहमियत देनी चाहिए जितनी स्वयं को। झुकने मे कोई व्यक्ति छोटा नहीं हो जाता।

7. अपनी गलतियों को भी देखना व पहचानना चाहिए और सुधारना चाहिए और जितनी जल्दी हो सके माफी मांगना चाहिए।

8. किसी भी रिश्ते मे 100 प्रतिशत तो नहीं मिलते। इसलिए यदि जो हमारी ओर से 50% है, यदि हम वो सारा दे दें तो दूसरी ओर से 25% तो मिल ही जाएगा। 75% अच्छा होने से वह रिश्ता अच्छा ही होता है।

9. सास , बहु और वो। यह वो हर जगह परेशान करता है। पति, पत्नी और वो के रिश्ते की तरह इस रिश्ते में भी कोई तीसरा आए, चाहे वो कोई भी हो तो मन मुटाव बढ़ जाता है। किसी दूसरे की बात पर ध्यान न देकर आपसी मत भेद को आपस मे ही मिटाए तो अच्छा रहता है। फोन पर कभी सास अपनी बेटी से या बहु नी मां से अगर एक दूसरे की बुराई करें तो वह भी दरार का कारण बनती है। यहां तक कि पति और ससुर को भी इस रिश्ते से दूर रखना चाहिए।

10. बहु की बेटी से या दूसरे कि बहुओं से और सास की मां से या फिर दूसरे की सास से तुलना न करें। आशाएं न रखें। किसी ने कुछ कर दिया तो भी अच्छा और अगर न किया तो भी अच्छा। उनकी क्षमता को देखते हुए व्यवहार करना चाहिए। क्षमता से बाहर तो मां भी अपनी बेटी को मना कर देती है। यदि मां डांटें तो कोई बात नहीं और यदि सास ने कुछ कहा तो मुहल्ले मे ढिंढोरा पीट दिया, ऐसा भी नहीं होना चाहिए।

जानती हूँ कि कहना आसान होता है पर करना मुश्किल, फिर भी कोशिश तो करी जा सकती है आखिर घर भी हमारा है और रिश्ते भी। और वैसे भी, तोड़ने से बेहतर तो जोड़ना ही है।

0 thoughts on “सास बहु कैसे बने सहेली, रिश्तों की सबसे बड़ी पहेली”

  1. बहुत सुंदर और सही बात कही है आपने । रिश्ते तोड़ने से बेहतर है उन्हें जोड़ना और कोशिशें दोनों तरफ से होनी चाहिए।

  2. I am sure everyone will relate to this article. Having no expectations that your MIL will be exactly like your mother is one big thing which helps. We also can never be the perfect daughter to them. I think the relationship should be of mutual respect and give space to each other.

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