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क्या तुम्हारी माँ ने तुम्हें कुछ नहीं सिखाया?

 नई शादी के कुछ ही दिनों बाद, पति देव को कुछ अच्छा सा खाना बना कर खुश करने का मन हुआ। शादी से पहले तो कभी रसोई में जा कर भी नही देखा था। खाना कैसे बनाते हैं पता ही न था। इंटरनेट व किताबें छान कर एक नए व्यंजन की विधि देखी। बड़े दिल से खाना बनाया और पति देव के लिए परोसा। पर यह क्या खाते ही पति देव ने थाली फेंक दी और कहा, “ये क्या बनाया है? क्या तुम्हारी मां ने तु्म्हें कुछ नहीं सिखाया?” सुनते ही दिल छलनी हो गया। पति देव का दिल तो जीत न पाई , अपना ही दिल तुड़वा बैठी। 

मां कई बार कहती थी, खाना बनाना सीख लो, शादी के बाद मुश्किल होगी। पर बस पढ़ाई में व्यस्त इतनी थी कि माँ की बात सुनी ही नही। पर उस दिन खुद को बहुत कोसा। अगर तब माँ की बात मानी होती तो यह ताना न सुनना पड़ता। पर यह ताना सिर्फ उस दिन का ही नही था। यह कहानी भी सिर्फ एक लड़की की नही। बल्की हर लड़की की है।

“क्या तुम्हारी माँ ने तुम्हें कुछ नहीं सिखाया?” शादी के बाद यह सवाल एक लड़की को रोज़ सुनना पड़ता है। हर घर के तौर तरीके एक दूसरे से अलग होते हैं। हर घर का खाने का स्वाद दूसरे से अलग होता है। इसलिए हर लड़की को शादी के बाद नए घर के तौर तरीकों को सीखने समझने में वक्त लग जाता है। परंतु इसका यह मतलब नहीं कि उसे कुछ आता नहीं। सभी जानते हैं कि भारतीय घरों में लड़कियों को बचपन से ही सिलाई, बुनाई, खाना पकाना, घर की साफ सफाई, व अन्य कई काम व कलाएं सिखाई जाती है, ये सोच कर कि बेटी ने पराए घर जाना है। 

दूसरी तरफ, लड़को को कभी कुछ नही सिखाया जाता। एक लड़का होना ही उनकी सब से बड़ी खासियत, उपलब्धी, एवं योग्यता होती है। न तो उन्हें कोई काम, न कोई जि़म्मेदारी, न दूसरों का मान सम्मान करना आता है। घर के काम छोड़, वे तो अपना काम भी खुद नही करते।

ज़रा सोचिए, बेटे जब शादी के बाद पति बनते है तब कैसा होता है। सुबह सुबह तैयार होते समय, पत्नी को आवाज़ दी जाती है कि ऑफिस जाने के कपड़े निकाल कर दो। गीला तौलिया बिस्तर पर ही छोड़ दिया जाता है। तब अगर उन्हे कोई कहे कि क्या तुम्हारी माँ ने तुम्हें कुछ नही सिखाया। खाने के समय जब बैठे इंतज़ार करते हैं कि पत्नी खाना परोस कर दे व खाने के बाद बर्तन उठाने आए, तब इन्हे कहा जाए कि क्या तुम्हारी माँ ने तुम्हें खाना डालना व अपने बर्तन रसोई में रखना नहीं सिखाया। 

अपने ही घर में सही तौर तरीके व रहने सहने के सही अंदाज़ बेटों को कोई नही सिखाता और सवाल बहु से किया जाता है कि  क्या तुम्हारी माँ ने तुम्हें कुछ नहीं सिखाया?

परंतु जब घर में कभी अनुचित बात या गर्मा गर्मी होती है तब सब झट से कह देते हैं कि ज़रूर बहु को ऐसी बातें उसकी मां ने सिखाई होंगी। घर में झगड़ा किसी और का होता है पर इलज़ाम बहु के सिर लगाया जाता है कि ज़रूर इसकी मां ने ही सिखाया होगा। यहां तक की अगर अनबन बाप बेटे की हो तो भी वजह बहु बन जाती है और ये कहा जाता है कि इसकी मां ने सिखा कर भेजा होगा। 

क्या हमारी माँ हमें ये सब सिखाती है? 

हाँ। माँ सिखाती है। बहुत कुछ सिखाती है। 

माँ सिखाती है कि पति से कभी लड़ना नही। 

माँ सिखाती है, “एक चुप, सौ सुख”। कोई कुछ भी कहे आगे से कुछ न कहना।

मां सिखाती है कि ससुरालवालों के सामने अपने मां बाप को कभी याद भी न करना।

मां सिखाती है चाहे कुछ भी हो पति के साथ ही रहना।

माँ सिखाती है कि खुद भी खुश रहना और दूसरों को भी खुश रखना। 

अब आप ही बताइए कि माँ क्या गलत सिखाती है!

Author:

A stay at home mother and a teacher by qualification, I have worked as a makeup artist for several years. Writing is my current passion which helps me in adding wings to my creativity.

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