बच्चों की छुट्टियों और मायके का आपस में बहुत गहरा सम्बन्ध है। जिनके मायके उन्हीं के शहर में होते हैं उनको तो शायद इस बात से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता पर जिनके मायके दूसरे शहर में होते हैं, वे सारा साल इंतजार करती हैं। जैसे ही बच्चों की छुट्टियां होंगी एक ही वाक्य दोहराया जाता है कि हम तो सारा साल अपने मायके नहीं जा पाती कम से कम छुट्टियों में तो एक महीना चैन से अपने मायके रहेंगे। मां के लिए तो ठीक है मायके गई और निश्चिंत हो गई कि नाना नानी बच्चे सम्भालेंगे और हमारी छुट्टी। बच्चों से ज्यादा मां को लगता है की हमारी छुट्टियां हैं। एक हद तक तो ठीक है कि मां को भी कुछ आराम चाहिए किन्तु बच्चों के शौक का भी ख्याल रखना ज़रूरी है। बच्चे तो कई बार वहाँ भी बोर हो जाते हैं।उनके लिए जैसे अपना घरवैसे ही नाना नानी का घर।

पहले बड़े और संयुक्त परिवार होते थे। घरों में बहुत से बच्चे होते थे और बच्चे भी ननिहाल जाना पसंद करते थे। आजकल बच्चों से ननिहाल जाने की बात करो तो एक दो दिन तो खुश रहते हैं पर फिर वही ढाक के तीन पात। इस बार मैने सोचा कि बच्चे भी बोर न हों और मुझे भी आराम मिले। काफी सोच विचार के बाद छुट्टियों का कार्यक्रम कुछ इस तरह तय किया –

1. पहले एक हफ्ता तो घर पर ही आराम किया। स्कूल के व्यस्त कार्यक्रम से आजादी जो मिली थी। साथ ही साथ गृहकार्य भी शुरु कराया। यह तय किया गया कि थोड़ा थोड़ा करके गृहकार्य खत्म करें।

2. जब मायके गई तो पड़ोस में आई अपनी मित्र के बच्चों को बुलाया और उनके साथ मिलकर पिट्ठू , पकड़न पकड़ाई व छुपन छुपाई के खेल खेले। बच्चों ने मिलकर खूब हुड़दंग किया और बड़े भी उन्हें देखकर बहुत खुश हुए।

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3. बच्चों को रचनात्मकता बहुत लुभाती है। बाज़ार से लाए खिलौने उन्हें कुछ दिन ही भाते हैं, इस बार बच्चों के साथ मिलकर गिट्टे व पिट्ठू खुद बनाए। खुद के बनाए खिलौनों से खेलने का उत्साह ही कुछ और था।

4. घर मे तरणताल बनाने वाले खिलौने ला कर, उनमें साबुन की झाग बनाकर बच्चों को खूब खिलाया। बच्चों के साथ साथ मैने भी खूब मस्ती की।

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5. शाम के समय उन्हें अन्य खेल क्रिड़ा के लिए खेल परिसर ले कर गई। आजकल खेल परिसर में कई खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनसे बच्चों का मनोरंजन भी होता है साथ ही साथ स्वास्थ्य भी बनता है। बच्चों के साथ साथ हम भी खेले, मनोरंजन के साथ व्यायाम भी, एक पंथ तीन काज।

6. एक हफ्ता शहर से बाहर बिताने का कार्यक्रम भी रखा। बच्चे इस बात से बेहद खुश थे की मम्मी पापा हमारे साथ वक्त बिता रहें हैं। यह सप्ताह साल का सबसे यादगार सप्ताह रहता हैं। वरना कभी मम्मी पापा व्यस्त तो कभी बच्चे अपनी पढाई से व्यस्त।

7. एक हफ्ता दादा दादी के घर ले कर गई। दादा दादी के लाड प्यार के बिना भला छुट्टियों का मजा ही क्या।

मैने तो इन सब प्रयासों द्वारा बच्चों की छुट्टियां यादगार बनाने की कोशिश की। आशा है आपको अच्छे लगे। आप अपने अनुभव भी ज़रूर बताइएगा।