इस वर्ष 25 अगस्त को गणेश चतुर्थी का आरम्भ होगा और 5 सितम्बर को समापन होगा।

आजकल गणेश चतुर्थी का महत्व बढता जा रहा है और अब इस त्यौहार को देश के हर कोने मे मनाया जाता है। गणपति भगवान विघ्नहरता माने जाते हैं। लोग गणेश भगवान की मूर्ति को घरों व मन्दिरो मे भी स्थापित करते हैं और फिर कोई पांच दिन व कोई दस दिन बाद धूमधाम से इसका विसर्जन करते हैं।

पिछले कुछ वर्षों से मेरी भी आस्था इस त्यौहार मे बढती जा रही है। जैसे ही पास के मंदिर मे गणपति जी को स्थापित करने का जुलूस धूमधाम से निकलता है तो मानो मेरे कदम खुद ब खुद उनकी तरफ खिचे चले जाते हैं। पूरे हर्ष उल्लास के साथ उसमें शामिल होती हूँ। सच मे जो भक्त भगवान की स्थापना मे व्यस्त होते हैं उनकी श्रद्धा और सहयोग देखकर मन भाव विभोर हो जाता है।गणपति भगवान की वो बढी सी आलीशान मूर्ति को जिस प्यार और श्रद्धा के साथ स्थापित करते हैं तो यूं लगता है की मानो वो स्वयं ही आ के सामने बैठे हों।

जिस एहतियात के साथ उन्हें बिठाया जाता है तो लगता है कि वे आहत न हो जाएं। ढोल, नगाड़े, नृत्य व संगीत के साथ जब जुलूस आता है और मंदिर पहुंचता है तो मन उद्वेलित हो जाता है। फिर सभी रीति रिवाजों के साथ उनकी पूजा अर्चना करना, प्रेम भाव से मिलजुल मंदिर मे एक साथ भोजन करना और पांच दिन तक एक त्योहार का सा माहौल रहता है। शाम के समय की आरती, दिन मे किसी ने अलग से पूजा , हवन या यग्य करवाना हो, ये सब देखकर लगता है कि त्योहारों का मौसम आ गया। वैसे तो त्योहारों का मौसम रक्षाबंधन से शुरु हो जाता है किन्तु गणेश चतुर्थी की बढती रौनक का अपना ही आनंद है। जिस तरह से सब लोग शाम की आरती के बाद एक साथ खाना खाते हैं, तो लगता है की गणेश जी ने अपनी भक्ति व प्रेम के एक सूत्र मे सबको बांध दिया हो।

पांच दिन तक मंदिर मे कपूर व चन्दन की महक मन को मोहित करती है। रोज़ पुष्पों से सुशोभित गणपति भगवान के दर्शन करने जाती हूँ तो वापस आने का मन ही नहीं करता। ऐसा लगता है की सामने बैठे विघ्नहरता मेरे मन की सारी बातें सुन रहे हों। बस ऐसा लगता है की यूहीं बैठे उनसे बातें करती रहूं। मन मे उठते भावनाओं के समंदर को बस वे ही सुन व समझ सकते हैं। उस समय उनके सामने बैठे एक अजीब सी आत्मिक शांति मिलती है। गणपति चतुर्थी का हर साल खास इंतजा़र रहता है।

पांच दिनों के बाद जब विसर्जन का समय आता है तो मन भावुक सा हो जाता है। किन्तु जब सब एक साथ एक स्वर मे गाते हैं, “गणपति बाप्पा मोरेया, अगले बरस तु जल्दी आ”, तो मन मे एक नई आशा जागती है और खुद को सांतवना देती हूँ की अगले वर्ष प्रभु फिर आएंगे विघ्न हरने के लिए।

आप सभी को भी मेरी ओर से गणेश चतुर्थी की बहुत बहुत शुभकामनाएं।

This post was published on mycity4kids : https://www.mycity4kids.com/parenting/my-kids-my-wings/article/mere-vighnaharata-aura-mai-n

cover image: desicomments.com