समंदर का लहरों से रिश्ता ( भाग २ )

समंदर में आया तूफ़ान, लहरों ने खाया उफ़ान, समंदर हुआ परेशान, करी कोशिश लूं लहरों को थाम, लहरें थी चंचल, बेताब और बदमस्त, ना रूकती,

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समंदर का लहरों से रिश्ता

समंदर ने कहा लहरों से, “कुछ देर तो थम जा बाहों में,
यूँ मचलती है क्यूँ , यूँ उछलती है क्यूँ,
क्या रखा हैं उन किनारों में.”
लहरें ना थमी , ना रुकी, ना ठहरी,
कहे लगी, “किनारा है मेरी मंजिल, ना आ तू मरी राहों में,
किनारे करता है मेरा इंतज़ार , जाना है ज़रूरी , ना आ तू मेरे पास,

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वर वधु की तलाश – विज्ञापनों के साथ बदलता समाज(एक हास्य लेख)

पहले ज़माने मे जब भी किसी मां बाप को अपनी लड़की के लिए वर की तलाश होती थी तो वे रिश्तेदारों को बोलते थे या अखबार में मैट्रीमोनीयल पर विज्ञापन देते थे। हर सप्ताह अखबार के मैट्रीमोनीयल कालम मे खोज कर चार पाँच विज्ञापनों पर गोला लगाते थे और फिर उनके बारे मे जाँच पड़ताल करते थे।

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