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​कुछ पाने की चाह मे

मैं भागती रही , दौड़ती रही,
कुछ पाने की चाह मे,

यह कर लूं, वह पा लूं, 

थमी नहीं रुकी नहीं,

लेकिन 

जीवन की शाम मे 

थोड़ा रुकी, थोड़ा थमी,

एक पल , एक क्षण के लिए,

क्या सोचा, क्या पाया, क्या खोया,

जो जैसा था , वो वैसा ही रहा।

मैं भाग रही थी, 

यूं ही कुछ पाने की चाह मे!

अब न कोई चाह है,

न कोई नई राह है।

शायद वह जीवन की कोई 

मृगतृष्णा थी।

जिसकी तलाश मे मैं,

भागती रही , दौड़ती रही,

कुछ पाने की चाह मे, 

जो पाया वो चाहा नहीं,

जो चाहा वो पाया नहीं, 

मैं दौड़ती रही,

कुछ पाने की चाह मे,

अब न तमन्ना हैं,

न ताकत है

फिर क्यों मैं भागी, 

कुछ पाने की चाह मे,

शायद यही जीवन का तथ्य है,

भागते रहो कुछ पाने की चाह मे।

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My Daughters My Pride

Why do I need to wear necklaces,

When I have the arms of my daughters around,

Why do I need any danglers,

When I have their chitter chatter about,

Why do I need any rings,

When I have their tiny fingers holding mine.

 

The two beautiful daughters of mine

Are far more precious than any diamond shine,

I don’t ever need any pearls,

I need not to wear any jewels,

Their sparkling smiles are my biggest treasure,

Their wonderful plays are my greatest pleasure.

 

One by one I hold them nearer,

So what if the world demands “the better”,

They are the better SUN than any SON,

Their talents are measurable to none,

They give so much love my heart can’t hold’

So pious are their hearts made of gold.

 

Easily I would say it to the world,

I am proud of my daughters,

Let the hanging heads mourn for “the good”,

Daughters are the blessing bestowed on you,

Thus, make merry and become joyous,

Be thankful to God for bringing His heiress.

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To Travel is to Live

How I wish to travel wide, 

Like an albatross flying high, 

sailing the seas and crossing the oceans, 

Gliding high and low over the hills ,

For travel is to see and live,

From meeting new people and eating new food, 

Learning new language of me and you,

Bridging the cultures , 

merging the boundaries, 

Travelling opens new possibilities,

Melting differences opening opportunities,

Thinning the clouds and sparkling wisdom 

Travelling takes us through the horizons

 To travel is to learn and experience, 

The lives of others and our own

To see, listen and explore , 

modern new world and folklore.

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​औरत तेरी यही कहानी

औरत तेरी यही कहानी, 

हर रिश्ता माँगे कुरबानी,

दिल का दर्द सहे छुप छुप के,

आँसु पोंछ अपने आँचल से,  

कहे, ‘ कुछ नही, था वो पानी’
औरत तेरी यही कहानी,

भावुक होकर युं पल भर में,

मिटा दे अपनी ही ज़िदगानी,

माँ बाप के घर की रोशनी,

ससुराल में जलती जाती,

मिटा के अपनी खुशियाँ सारी,

दूजों की झोली भरती जाती,
औरत तेरी यही कहानी,

बन कली जो खिली इक बगिया में,

बन फूल हर कदम कुचली जाती,

राजकुमारी जैसे जीती बचपन में,

पल भर में बन जाती दासी,

दुख से भरी हो जिसकी जीवनी,

खुशियाँ दर दर वो बिखराती,
औरत तेरी यही कहानी,

पँछि बन उड़ने की चाहत, 

खुला आकाश छूने की ख्वाहिश,

काश जी सकती अपने सपने,

कटे न होते तेरे ये पर,

बन पतंग हवाओं से बतियाती,

गर डोर तेरी न काटी जाती,
औरत तेरी यही कहानी,

बस पिंजरे में सिसकी भरती,

सहना सब पर कहना न कुछ,

न थकना, न हताश होना,

न मुस्कान का कम होना,

दुखोंमें अपने सुख को ढूंढना,

दिल की गागर में सागर होना,
औरत तेरी यही कहानी,

न माँ, न मायका अपना,

ससुराल भी पराया होता,

पति के चरणों के धूल की भांति,

क्या कभी तू भी समझी जाती,

किस कोने में घर है तेरा,

ये जग तो पल भर का डेरा,
औरत तेरी यही कहानी,

ना तेरी हाँ समझी जाती,

चुप्पी तेरी सहमती जताती,

आखिर में तेरी बारी आती,

मान नही, अभिमान नही,

तेरा कभी सम्मान नही,

बस मर्यादा में फंस जाती,
औरत तेरी यही कहानी,

दुख की कलम से लिखी जाती,

दर्द भरी स्याहि से,

आँसुओं के पन्ने में समाती,

जो चाहे वो कभी न पाती,

अपने मन की कह न पाती,

बस चुपचाप ही सहती जाती,
औरत तेरी यही कहानी,

सहनशीलता की निशानी,

चुप्पी तोड़, अब कह दे सब कुछ,

आँसु पोंछ कर हँस दे अब बस,

और नही, अब और नही,

दुख भरी ये दास्तान और नही,

खुशियों की कलम से लिख दे अब,

सुख परिपूर्ण इक नई कहानी।
औरत तेरी यही कहानी, 

हर रिश्ता माँगे कुरबानी,

दिल का दर्द सहे छुप छुप के,

आँसु पोंछ अपने आँचल से,  

कहे, ‘ कुछ नही, था वो पानी’।

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नारी है सम्मान की अधिकारी

नारी का करो सम्मान,

नारी है जीवन का आधार,

सुखद होगा तभी समाज,

जब पाएगी नारी समान अधिकार,

बन बेटी जब वो घर आए,

घर मे सुख शाँति लहराए,

खिलखिलाती प्यार फैलाए,

फिर भी अभिमान एक बेटा पाए,

लेकर बस्ता स्कूल वह जाए,

माँ बाप का सर गर्वित करवाए,

बने वकील, डाक्टर, अधिकारी,

सर्व सम्पन्न है आज की नारी,

बहु बने औऱ बने माँ जब,

त्याग की मूरत, ममता की सूरत,

घर बन जाए उसका सँसार,

फिर भी ना पाए अपना अधिकार,

नारी को गर मिले सम्मान,

पर्गति करे सारा समाज,

जो सुख शाँति घर मे आए,

वही सारे जग मे लहराए।

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आज फिर खुद से दोस्ती कर लेंं

चलो आज फिर खुद से दोस्ती कर लें,

खुद का हाथ फिर खुद से थाम लें,

रिश्तों के भंवर में उलझी अपनी डोर को 

आओ आज खुद ही छुड़ा लें,

सबको प्यार देते हैं हम, क्यूं न थोड़ा प्यार आज खुद से करें हम।

बहु, बीवी, माँ , सबका फर्ज़ निभाते हैं,

फिर क्यूं खुद को भूल जाते हैं ?

चाहते हैं की कोई हम से प्यार करे, 

हमारे इस दामन को खुशियों से भर दे,

जब बाँटते है हम, खुशियाँ सभी को, 

तो फिर खुशियों की उम्मीद दूसरों से करें क्यों?

पति को चाहा तो खुद को भुलाया,

माँ बन कर जैसे खुद को मिटाया, 

जोड़े नए रिश्ते पर तोड़ा खुद ही को,

चलो आज ढूंढे खुद में खुद ही को।

न शिक्वा, न शिकायत, 

न आँसु, न हिदायत,

अपनी चाहतों को दे अपना आसमान,

खुद को निखारें, बने खुद का सहारा,

देखें नए सपने, दें खुद का साथ हम अब,

अपने ही दोस्त बन कर, चलें खुद के साथ हम अब,

भरें अपने जहाँ में रंग कुछ नए इस कदर,

कि मिल जाँए आज खुद से, एक नया दोस्त बन कर।

करें एक नई दोस्ती, एक नई शुरुआत अब,

उम्मीदें दूसरों से न हो, बस खुद से हो हर पल,

देंगे सभी को सब कुछ, पर लेंगे न किसी से कुछ,

थामेंगे हाथ अपना, साथ देंगे खुद का हर पल,

खुद के दोस्त बन कर, जानें खुद को इस तरह,

कि भूला न पाएँ कभी यह नया याराना।

न सोचें कि कोई नही है अपना, 

न सोचें कहाँ गया वो सपना,

दिल में रखें विश्व़ास हम अब,

कि खुद के साथ खड़े हैं हम अब,

करी खुद से जो दोस्ती, तो निभाऐंगे हर पल, 

करा खुद से ये वादा, भुलाऐंगे न अब हम,

आज खुद से दोस्ती कर के, करें खुद को खुश अब, 

थामे खुद का हाथ अब, चलें एक नए डगर पर।

हो साथ खुद.का, एहसास खुद का,

सपनों में अपने, विश्व़ास खुद का,

आओ आज फिर से खुद से दोस्ती कर लें।

न रोऐं छुप छुप के, न हो दिल की बात दिल में, 

बनें खुद का सहारा, दें साथ अब खुद ही का,

प्यार जो किया किसी से, दुखाया दिल अपना,

भरे आँखों में आँसू, दिया दर्द खुद.को,

आओ आज फिर से करो खुद से दोस्ती, 

दो प्यार खुद को भी, जिओ खुद भी जिंदगी।